श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 193
 
 
श्लोक  2.15.193 
तबे सार्वभौम करे आर निवेदन ।
तोमार सङ्गे सन्यासी आछे दश - जन ॥193॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद सार्वभौम भट्टाचार्य ने कहा, “हे प्रभु, आपके साथ दस संन्यासी हैं।”
 
After this Sarvabhauma Bhattacharya said, “O Lord, there are ten sannyasis with you.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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