श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 191
 
 
श्लोक  2.15.191 
तबे सार्वभौम प्रभुर चरणे धरिया ।
‘दश - दिन भिक्षा क र’ कहे विनति करिया ॥191॥
 
 
अनुवाद
तब सार्वभौम भट्टाचार्य ने भगवान के चरण कमलों को पकड़ लिया और विनम्रतापूर्वक विनती की, “कृपया कम से कम दस दिनों तक दोपहर का भोजन स्वीकार करें।”
 
Then Sarvabhauma held the feet of Mahaprabhu and humbly said, “Please take food for at least ten days.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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