सर्वशक्तिमान भगवान की तीन शक्तियाँ हैं - आंतरिक, बाहरी और सीमांत। बंधी हुई आत्माएँ, जिन्हें प्रभु को भूलने के कारण निंदित किया जाता है, को बाहरी शक्ति के नियंत्रण में रखा जाता है जब वह भौतिक दुनिया बनाती है। भौतिक प्रकृति के तीनों रूप जीवित इकाई को भय की निरंतर स्थिति में रखते हैं (भयं द्वितीयाभिनिवेशतः)। बाहरी शक्ति द्वारा नियंत्रित होने के कारण बंधी हुई आत्मा हमेशा भयभीत रहती है; इसलिए बंधी हुई आत्मा को हमेशा सर्वशक्तिमान भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि बाहरी शक्ति (माया) पर विजय प्राप्त की जाए ताकि वह अब अपनी शक्तियों को प्रकट न करे, जो सभी जीवित संस्थाओं को जोड़ती हैं, गति और जड़। इस तरह से प्रार्थना करने से व्यक्ति भगवान के साथ लगातार संगति में रहने के लिए पात्र बन जाएगा, इस प्रकार घर वापस जाने, भगवान के पास वापस जाने के मिशन को पूरा करेगा।
