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श्लोक 2.15.172  |
एक उडुम्बर वृक्षे लागे कोटि - फले ।
कोटि ये ब्रह्माण्ड भासे विरजार जले ॥172॥ |
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| अनुवाद |
| “जिस प्रकार उडुम्बर वृक्ष पर करोड़ों फल लगते हैं, उसी प्रकार विरजा नदी के जल पर करोड़ों ब्रह्माण्ड तैरते हैं। |
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| “Just as the Udumbara tree bears millions of fruits, similarly millions of universes float in the waters of the river Viraja. |
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