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श्लोक 2.15.141  |
मधुर - चरित्र कृष्णेर मधुर - विलास ।
चातुर्य - वैदग्ध्य करे याँर लीला - रस ॥141॥ |
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| अनुवाद |
| "उनका चरित्र अत्यंत मधुर है और उनकी लीलाएँ मधुर हैं। वे बुद्धि में निपुण हैं, और इसीलिए वे अपनी सभी लीलाओं और रसों का आनंद लेते हैं।" |
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| "His character is extremely sweet, and his pastimes are sweet. He is adept in intellect. Thus, he enjoys all the pastimes and rasas." |
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