श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  2.15.141 
मधुर - चरित्र कृष्णेर मधुर - विलास ।
चातुर्य - वैदग्ध्य करे याँर लीला - रस ॥141॥
 
 
अनुवाद
"उनका चरित्र अत्यंत मधुर है और उनकी लीलाएँ मधुर हैं। वे बुद्धि में निपुण हैं, और इसीलिए वे अपनी सभी लीलाओं और रसों का आनंद लेते हैं।"
 
"His character is extremely sweet, and his pastimes are sweet. He is adept in intellect. Thus, he enjoys all the pastimes and rasas."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd