श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.15.13 
आचार्येर निमन्त्रण - आश्चर्य - कथन ।
विस्ता रि’ वणियाछेन दास - वृन्दावन ॥13॥
 
 
अनुवाद
श्री अद्वैत आचार्य का निमंत्रण भी एक अद्भुत कथा है। वृन्दावनदास ठाकुर ने इसका अत्यंत सजीव वर्णन किया है।
 
The invitation of Sri Advaita Acharya is another remarkable story. It has been described in detail and clearly by Vrindavana Das Thakur.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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