vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना
»
श्लोक 125
श्लोक
2.15.125
राजा बले - व्यथा तुमि पाइले कोन ठाञि ? ।
मुकुन्द कहे, - अति - बड़ व्यथा पाइ नाइ ॥125॥
अनुवाद
जब राजा ने मुकुंद से पूछा, ‘तुम्हें कहां दर्द हो रहा है?’ तो मुकुंद ने उत्तर दिया, ‘मुझे ज्यादा दर्द नहीं है।’
“When the king asked Mukunda, “Where do you feel pain?” Mukunda replied, “I don’t feel much pain.”
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd