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श्लोक 2.15.123  |
शिखि - पिच्छ देखि’ मुकुन्द प्रेमाविष्ट हैला ।
अति - उच्च टुङ्गि हैते भूमिते पड़िला ॥123॥ |
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| अनुवाद |
| “मोर पंख वाले पंखे को देखकर ही मुकुंददास भगवान के प्रेम में मग्न हो गए और ऊंचे मंच से जमीन पर गिर पड़े। |
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| “Seeing the fan made of peacock feathers, Mukunda was filled with love for God and he fell down from that high seat to the ground. |
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