श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  2.15.114 
किबा रघुनन्दन - पिता, तुमि - तार तनय ?।
निश्चय करिया कह, याउक संशय’ ॥114॥
 
 
अनुवाद
"या श्रील रघुनन्दन आपके पिता हैं और आप उनके पुत्र हैं? कृपया मुझे तथ्य बताएँ ताकि मेरा संदेह दूर हो जाए।"
 
"Or is Srila Raghunandana your father and you his son? Please tell me the truth, so that my doubts are cleared."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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