श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  2.15.105 
सत्यराज बले , - वैष्णव चिनिब केमने ? ।
के वैष्णव, कह ताँर सामान्य लक्षणे ॥105॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर सत्यराज बोले, "मैं वैष्णव को कैसे पहचान सकता हूँ? कृपया मुझे बताएँ कि वैष्णव क्या होता है? उसके सामान्य लक्षण क्या हैं?"
 
Hearing this, Satyaraj said, "How can I recognize a Vaishnava? Please tell me who a Vaishnava is? What are his common characteristics?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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