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श्लोक 2.15.101  |
तोमार कि कथा, तोमार ग्रामेर कुकुर ।
सेइ मोर प्रिय, अन्य - जन रहु दूर ॥101॥ |
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| अनुवाद |
| "तुम्हारी तो बात ही क्या, तुम्हारे गाँव में रहने वाला एक कुत्ता भी मुझे बहुत प्रिय है। फिर दूसरों की तो बात ही क्या?" |
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| "What about you? Even the dog in your village is very dear to me. So what about the others?" |
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