श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  2.15.101 
तोमार कि कथा, तोमार ग्रामेर कुकुर ।
सेइ मोर प्रिय, अन्य - जन रहु दूर ॥101॥
 
 
अनुवाद
"तुम्हारी तो बात ही क्या, तुम्हारे गाँव में रहने वाला एक कुत्ता भी मुझे बहुत प्रिय है। फिर दूसरों की तो बात ही क्या?"
 
"What about you? Even the dog in your village is very dear to me. So what about the others?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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