| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन » श्लोक 84 |
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| | | | श्लोक 2.14.84  | पण्डित, गम्भीर, दुँहे - प्रामाणिक जन ।
बाल - चाञ्चल्य करे, कराह वर्जन ॥84॥ | | | | | | | अनुवाद | | “भट्टाचार्य और रामानन्द राय से कहो कि वे अपना बाल-क्रीड़ा बंद कर दें, क्योंकि वे दोनों विद्वान् और अत्यन्त गम्भीर एवं महान् व्यक्तित्व वाले हैं।” | | | | “Tell both Bhattacharya and Ramanand Rai to stop their childish games, because both of them are very learned, serious and great men.” | | ✨ ai-generated | | |
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