श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  2.14.77 
कभु एक मण्डल, कभु अनेक मण्डल ।
जल - मण्डूक - वाद्ये सबे बाजाय करताल ॥77॥
 
 
अनुवाद
पानी में रहते हुए वे कभी एक घेरा बनाते थे और कभी कई घेरे बनाते थे, और पानी में रहते हुए वे झांझ बजाते थे और मेंढकों की टर्राहट की नकल करते थे।
 
In the water, they would sometimes draw a circle, sometimes several. They would play cymbals underwater, imitating the croaking of frogs.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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