श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  2.14.54 
तबे महाप्रभु सब हस्ती घुचाइल ।
निज - गणे रथ - काछि टानिबारे दिल ॥54॥
 
 
अनुवाद
उस समय श्री चैतन्य महाप्रभु ने सभी हाथियों को स्वतंत्र कर दिया तथा रथ की रस्सियाँ अपने सेवकों के हाथों में सौंप दीं।
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu released all the elephants and handed over the ropes of the chariot to his companions.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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