श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.14.5 
सार्वभौम - उपदेशे छाड़ि’ राज - वेश ।
एकला वैष्णव - वेशे करिल प्रवेश ॥5॥
 
 
अनुवाद
सार्वभौम भट्टाचार्य के आदेशानुसार, राजा ने अपना राजसी वस्त्र त्याग दिया था। अब वे वैष्णव वेश में उद्यान में प्रवेश कर गए।
 
As per the advice of Sarvabhauma Bhattacharya, the king gave up his royal attire and now entered the garden in Vaishnava attire.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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