श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.14.33 
दधि, दुग्ध, ननी, तक्र, रसाला, शिखरिणी ।
स - लवण मुद्गाङ्कर, आदा खानि खानि ॥33॥
 
 
अनुवाद
वहाँ दही, दूध, मक्खन, छाछ, फलों का रस, तले हुए दही और मिश्री से बनी एक डिश, तथा कटे हुए अदरक के साथ नमकीन मूंग दाल अंकुरित थी।
 
It contained curd, milk, butter, buttermilk, fruit juice, shikharini (fried curd and sugar) and salted mung bean sprouts with chopped ginger.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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