श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 238
 
 
श्लोक  2.14.238 
भङ्गि करि’ स्वरूप सबार श्रम जानाइल ।
भक्त - गणेर श्रम देखि’ प्रभुर बाह्य हैल ॥238॥
 
 
अनुवाद
तब स्वरूप दामोदर ने भगवान को बताया कि सभी भक्त थके हुए हैं। यह स्थिति देखकर श्री चैतन्य महाप्रभु को अपनी अंतरात्मा की शांति प्राप्त हुई।
 
Then Swarupa Damodara informed Mahaprabhu that all the devotees were exhausted. Seeing this, Mahaprabhu regained consciousness.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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