श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 231
 
 
श्लोक  2.14.231 
रसावेशे प्रभुर नृत्य, स्वरूपेर गान ।
‘बल’ ‘बल’ बलि’ प्रभु पाते निज - काण ॥231॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु आनंदित होकर नृत्य कर रहे थे और स्वरूप दामोदर गा रहे थे, तब भगवान ने कहा, "गाते रहो! गाते रहो!" तब भगवान ने अपने कान फैलाए।
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu was dancing in a trance of passion and Swarupa Damodara was singing, Mahaprabhu said, "Keep singing! Keep singing!" Then Mahaprabhu opened his ears.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd