श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 218
 
 
श्लोक  2.14.218 
स्वरूप कहे , - श्रीवास, शुन सावधाने ।
वृन्दावन - सम्पद्तोमार नाहि पड़े मने? ॥218॥
 
 
अनुवाद
स्वरूप दामोदर ने तब उत्तर दिया, "हे श्रीवास, कृपया मेरी बात ध्यान से सुनिए। आप वृन्दावन के दिव्य ऐश्वर्य को भूल गए हैं।
 
Then Swarupa Damodara turned and said, "Hey Srivasa, listen to me carefully. You have forgotten the divine splendor of Vrindavan.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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