श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 164
 
 
श्लोक  2.14.164 
एत शुनि’ बाड़े प्रभुर आनन्द - सागर ।
‘कह, कह’ कहे प्रभु, बले दामोदर ॥164॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही श्री चैतन्य महाप्रभु ने ये बातें सुनीं, उनके दिव्य आनंद का सागर उमड़ पड़ा। इसलिए उन्होंने स्वरूप दामोदर से कहा, "बोलते रहो, बोलते रहो।" और इस प्रकार स्वरूप दामोदर ने अपनी बात जारी रखी।
 
Hearing these words, Mahaprabhu's divine joy began to surge. So he said to Swarup Damodara, "Keep on saying, keep on saying." And Swarup Damodara continued.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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