श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  2.14.136 
दामोदर कहे , - ऐछे मानेर प्रकार ।
त्रिजगते काहाँ नाहि देखि शुनि आर ॥136॥
 
 
अनुवाद
स्वरूप दामोदर बोले, "तीनों लोकों में ऐसा अहंकार कहीं नहीं है। कम से कम मैंने तो ऐसा न तो कभी देखा है और न ही सुना है।"
 
Swarupa Damodara said, "There is no such ego in the three worlds. At least I have neither seen nor heard of it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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