श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  2.14.127 
स्वरूप कहे , - प्रेमवतीर एइ त’ स्वभाव ।
कान्तेर औदास्य - लेशे हय क्रोध - भाव ॥127॥
 
 
अनुवाद
स्वरूप दामोदर ने उत्तर दिया, "प्रेम से पीड़ित लड़की का स्वभाव है कि वह अपने प्रेमी की ओर से किसी भी प्रकार की उपेक्षा पाकर तुरन्त क्रोधित हो जाती है।"
 
Swarup Damodar replied, “It is the nature of a love-stricken girl to become instantly angry when she is neglected by her lover.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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