श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  2.14.121 
नाना - पुष्पोद्याने तथा खेले रात्रि - दिने ।
लक्ष्मीदेवीरे सङ्गे नाहि लय कि कारणे? ॥121॥
 
 
अनुवाद
"भगवान वहाँ विभिन्न पुष्प वाटिकाओं में दिन-रात अपनी लीलाओं का आनंद लेते हैं। लेकिन वे लक्ष्मीदेवी को अपने साथ क्यों नहीं ले जाते?"
 
"The Lord enjoys pastimes in various flower gardens day and night. But why doesn't He take Lakshmidevi with Him?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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