श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.14.113 
प्रातःकाले महाप्रभु निज - गण लञा ।
जगन्नाथ दर्शन कैल सुन्दराचले याञा ॥113॥
 
 
अनुवाद
प्रातःकाल श्री चैतन्य महाप्रभु अपने निजी सहयोगियों को साथ लेकर सुन्दरकाल में भगवान जगन्नाथ के दर्शन हेतु गये।
 
In the morning, Sri Chaitanya Mahaprabhu, along with his personal companions, went to Sundarachala to have darshan of Lord Jagannath.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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