श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  2.14.105 
‘जगन्नाथ - वल्लभ’ नाम बड़ पुष्पाराम ।
नव दिन करेन प्रभु तथाइ विश्राम ॥105॥
 
 
अनुवाद
उनकी लीलाओं का उद्यान बहुत विशाल था और उसका नाम जगन्नाथ-वल्लभ था। श्री चैतन्य महाप्रभु ने वहाँ नौ दिनों तक विश्राम किया।
 
The garden where Mahaprabhu was performing his pastimes was very big and was called “Jagannath Vallabh”.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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