श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  2.14.104 
नव दिन गुण्डिचाते रहे जगन्नाथ ।
महाप्रभु ऐछे लीला करे भक्त - साथ ॥104॥
 
 
अनुवाद
श्री जगन्नाथदेव लगातार नौ दिनों तक गुंडिका मंदिर में रहे। इस दौरान श्री चैतन्य महाप्रभु भी वहाँ रहे और अपने भक्तों के साथ वे लीलाएँ कीं जिनका वर्णन पहले ही किया जा चुका है।
 
Lord Jagannath resided in the Gundicha Temple for nine days. Meanwhile, Sri Chaitanya Mahaprabhu also stayed there and performed the pastimes with his devotees, which have already been described.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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