श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  2.13.67 
भक्त - गण अनुभवे, नाहि जाने आन ।
श्री - भागवत - शास्त्र ताहाते प्रमाण ॥67॥
 
 
अनुवाद
रथयात्रा के समक्ष श्री चैतन्य महाप्रभु का नृत्य केवल शुद्ध भक्त ही देख सकते थे। अन्य लोग इसे समझ नहीं सकते थे। भगवान कृष्ण के इस अद्भुत नृत्य का वर्णन श्रीमद्भागवतम् नामक ग्रंथ में मिलता है।
 
Only pure devotees could experience Mahaprabhu dancing before the chariot of the Rath Yatra. Others could not understand it. The description of Lord Krishna's extraordinary dance is found in the Srimad Bhagavatam.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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