श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.13.65 
लीलावेशे प्रभुर नाहि निजानुसन्धान ।
इच्छा जानि ‘लीला शक्ति’ करे समाधान ॥65॥
 
 
अनुवाद
निस्सन्देह, भगवान् अपनी दिव्य लीलाओं के दौरान स्वयं को भूल गए थे, किन्तु उनकी अन्तरंग शक्ति (लीला-शक्ति) ने भगवान् के इरादों को जानकर सारी व्यवस्था कर दी।
 
Mahaprabhu forgot himself during his divine pastimes, but his inner power (Lila Shakti) knowing his feelings made all the arrangements.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd