श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.13.51 
सात ठाञि बुले प्रभु ‘हरि’ ‘हरि’ बलि’ ।
‘जय जगन्नाथ’, बलेन हस्त - युग तुलि’ ॥51॥
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य महाप्रभु सातों समूहों में घूमते हुए पवित्र नाम “हरि, हरि!” का जाप करते रहे। अपनी भुजाएँ उठाकर उन्होंने जयघोष किया, “भगवान जगन्नाथ की जय हो!”
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu was wandering through the seven groups, chanting, “Hari! Hari!” He raised both his hands and loudly exclaimed, “Jai Jagannatha!”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)