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श्लोक 2.13.44  |
कुलीन - ग्रामेर एक कीर्तनीया - समाज ।
ताहाँ नृत्य करेन रामानन्द, सत्यराज ॥44॥ |
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| अनुवाद |
| उस गांव में कुलीनग्राम नाम से एक संकीर्तन दल था और रामानन्द तथा सत्यराज को इस दल में नर्तक नियुक्त किया गया था। |
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| There was a group of kirtan singers from a village called Kulin-gram, in which Ramanand and Satyaraj were appointed as dancers. |
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