श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 199
 
 
श्लोक  2.13.199 
नाना - देशेर देशी यत यात्रिक जन ।
निज - निज - भोग ताहाँ करे समर्पण ॥199॥
 
 
अनुवाद
जगन्नाथ पुरी में विभिन्न देशों से आये सभी आगंतुकों तथा स्थानीय भक्तों ने भगवान को अपने हाथों से पकाया हुआ भोजन अर्पित किया।
 
Pilgrims coming to Jagannath Puri from different countries and local devotees offered food cooked by their own hands to Jagannathji.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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