श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 186
 
 
श्लोक  2.13.186 
प्रभुर वचने राजार मने हैल भय ।
सार्वभौम कहे , - तुमि ना कर संशय ॥186॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान चैतन्य ने बाह्य क्रोध दिखाया तो राजा प्रतापरुद्र भयभीत हो गए, लेकिन सार्वभौम भट्टाचार्य ने राजा से कहा, "चिंता मत करो।"
 
King Prataparudra became frightened when Mahaprabhu showed his outward anger, but Sarvabhauma Bhattacharya told the king, “Don’t worry.”
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd