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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 2: मध्य लीला
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अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य
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श्लोक 171
श्लोक
2.13.171
आनन्दोन्मादे उठाय भावेर तरङ्ग ।
नाना - भाव - सैन्ये उपजिल युद्ध - रङ्ग ॥171॥
अनुवाद
दिव्य आनंद के उन्माद ने विविध भावनाओं की लहरें पैदा कर दीं। ये भावनाएँ मानो विरोधी सैनिक आपस में युद्ध कर रहे हों।
The frenzy of divine bliss generated waves of various emotions, which seemed like rival soldiers engaged in battle.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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