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श्लोक 2.13.168  |
श्री - जगन्नाथेर देखे श्री - मुख - कमल ।
ताहार उपर सुन्दर नयन - युगल ॥168॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु ने भगवान जगन्नाथ के सुन्दर कमल-सदृश मुख और नेत्रों को देखा। |
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| Sri Chaitanya Mahaprabhu saw the beautiful lotus-like face and eyes of Lord Jagannatha. |
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