स्वरूप - गोसाञि र भाग्य ना याय वर्णन ।
प्रभुते आविष्ट याँर काय, वाक्य, मन ॥163॥
अनुवाद
स्वरूप दामोदर गोस्वामी के सौभाग्य का वर्णन कोई नहीं कर सकता, क्योंकि वे सदैव अपने शरीर, मन तथा वचन से भगवान की सेवा में तल्लीन रहते हैं।
The good fortune of Swarupa Damodara Goswami cannot be described, because he is always engaged in the service of Mahaprabhu with his body, mind and speech.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥