श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  2.13.131 
आमा लञा पुनः लीला करह वृन्दावने ।
तबे आमार मनो - वाञ्छा हय त’ पूरणे ॥131॥
 
 
अनुवाद
"अतः मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप वृन्दावन पधारें और मेरे साथ लीलाओं का आनंद लें। यदि आप ऐसा करेंगे, तो मेरी मनोकामना पूर्ण हो जाएगी।"
 
"Therefore, I request you to come to Vrindavan and play with me. If you do so, my wish will be fulfilled."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)