श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  2.13.123 
एइ श्लोकार्थ पूर्वे करियाछि व्याख्यान ।
श्लोकेर भावार्थ करि सङ्क्षेपे आख्यान ॥123॥
 
 
अनुवाद
इस श्लोक की व्याख्या मैं पहले ही कर चुका हूँ। अब मैं इसका संक्षिप्त वर्णन करूँगा।
 
I have already explained this verse. Now I will briefly explain it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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