vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य
»
श्लोक 117
श्लोक
2.13.117
जगन्नाथे मग्न प्रभुर नयन - हृदय ।
श्री - हस्त - युगे करे गीतेर अभिनय ॥117॥
अनुवाद
भगवान जगन्नाथ में पूर्णतः लीन अपने नेत्रों और मन के साथ चैतन्य महाप्रभु ने अपनी दोनों भुजाओं से गान का नाटक प्रारम्भ किया।
Chaitanya Mahaprabhu, with his eyes and mind fixed on Lord Jagannatha, began to enact the song with both his hands.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×