श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  2.13.115 
धीरे धीरे जगन्नाथ करेन गमन ।
आगे नृत्य करि’ चलेन शचीर नन्दन ॥115॥
 
 
अनुवाद
भगवान जगन्नाथ का रथ धीरे-धीरे चलने लगा, जबकि माता शची का पुत्र आगे-आगे नाचता हुआ आगे बढ़ रहा था।
 
Then Jagannathji's chariot started moving slowly and Sachimata's sons came forward and started dancing in front of the chariot.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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