श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  2.13.114 
एइ धुया उच्चैः - स्वरे गाय दामोदर ।
आनन्दे मधुर नृत्य करेन ईश्वर ॥114॥
 
 
अनुवाद
जब स्वरूप दामोदर ने यह श्लोक उच्च स्वर में गाया, तो श्री चैतन्य महाप्रभु पुनः दिव्य आनंद में लयबद्ध होकर नृत्य करने लगे।
 
While Swarupa Damodara was singing this refrain loudly, Sri Chaitanya Mahaprabhu, immersed in transcendental bliss, began to dance to the rhythm again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)