श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  2.13.104 
सर्वाङ्गे प्रस्वेद छुटे ताते रक्तोद्गम ।
‘जज गग’ ‘जज गग’ - गद्गद - वचन ॥104॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु के पूरे शरीर से पसीना बह रहा था और साथ ही रक्त भी बह रहा था। वे आनंद से रुंधे हुए स्वर में "जज गग, जज गग" ध्वनि कर रहे थे।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu was sweating profusely and bleeding profusely all over his body. In his ecstasy, he was making a low voice, "Judge Gag, Judge Gag!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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