श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  2.13.100 
सुभद्रा - बलरामेर हृदये उल्लास ।
नृत्य देखि’ दुइ जनार श्री - मुखेते हास ॥100॥
 
 
अनुवाद
सुभद्रा और बलराम दोनों के हृदय में अपार प्रसन्नता और उल्लास का अनुभव हुआ। नृत्य देखकर वे मुस्कुरा रहे थे।
 
Both Goddess Subhadra and Lord Balarama felt immense happiness and emotion in their hearts.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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