श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  2.12.69 
एइ - मत महाप्रभु भक्त - गण - सङ्गे ।
निरन्तर क्रीड़ा करे सङ्कीर्तन - रङ्गे ॥69॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने शुद्ध भक्तों के बीच रहकर अपनी लीलाएँ कीं और संकीर्तन आन्दोलन का प्रसार किया।
 
Thus Sri Chaitanya Mahaprabhu worked in the society of His pure devotees, performing His pastimes and expanding the sankirtana movement.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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