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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  2.12.44 
राज - मन्त्री रामानन्द - व्यवहारे निपुण ।
राज - प्रीति कहि’ द्रवाइल प्रभुर मन ॥44॥
 
 
अनुवाद
श्री रामानन्द राय वास्तव में राजा के कूटनीतिज्ञ मंत्री थे। उनका सामान्य व्यवहार अत्यंत कुशल था, और श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रति राजा के प्रेम का वर्णन मात्र से ही, उन्होंने धीरे-धीरे भगवान का मन कोमल कर दिया।
 
Sri Ramanand Rai was undoubtedly the king's wise minister. He was extremely adept at general conduct. He touched Sri Chaitanya Mahaprabhu's heart by describing the king's love for him.
तात्पर्य
भौतिक जगत में एक कूटनीतिज्ञ यह जानता है कि लोगों के साथ कैसे व्यवहार करना है, विशेषकर राजनीतिक मामलों में। भगवान के कुछ महान भक्तों - जैसे रामानंद राय, रघुनाथ दास गोस्वामी, सनातन गोस्वामी और रूप गोस्वामी - सरकारी अधिकारी थे और एक बहुत ही संपन्न गृहस्थ जीवन की पृष्ठभूमि थी। नतीजतन वे जानते थे कि लोगों के साथ कैसे व्यवहार करना है। कई मामलों में हमने रूप गोस्वामी, रघुनाथ दास गोस्वामी और रामानंद राय की कूटनीति को भगवान की सेवा में नियोजित करते देखा है। जब रघुनाथ दास गोस्वामी के पिता और चाचा को सरकारी अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार किया जाना था, रघुनाथ दास गोस्वामी ने उन्हें छिपा दिया और व्यक्तिगत रूप से सरकारी अधिकारियों से मिले और कूटनीतिक रूप से मामले को सुलझा लिया। यह तो सिर्फ एक उदाहरण है। इसी तरह, सनातन गोस्वामी ने अपने मंत्रित्व से इस्तीफा देने के बाद, जेल में डाल दिया गया था, और उन्होंने जेल के परिचारक को रिश्वत दी ताकि वे नवाब के चंगुल से निकल सकें और श्री चैतन्य महाप्रभु के साथ रह सकें। अब हम भगवान के एक सबसे भरोसेमंद भक्त रामानंद राय को देखते हैं, जो कूटनीतिक रूप से श्री चैतन्य महाप्रभु के हृदय को कोमल करते हैं, इस तथ्य के बावजूद कि भगवान ने निश्चित रूप से राजा से नहीं मिलने का फैसला किया था। रामानंद राय की कूटनीति और सर्वभौम भट्टाचार्य और अन्य सभी महान भक्तों के अनुरोध सफल हुए। निष्कर्ष यह है कि भगवान की सेवा के लिए प्रयुक्त कूटनीति भक्ति सेवा का एक रूप है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)