श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 208
 
 
श्लोक  2.12.208 
प्रभुर आगे पुरी, भारती, दुँहार गमन ।
स्वरूप, अद्वैत , - दुँहेर पाश्चै दुइ - जन ॥208॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु मंदिर की ओर चले, तो परमानंद पुरी और ब्रह्मानंद भारती उनके आगे-आगे चले, और उनके दोनों ओर स्वरूप दामोदर और अद्वैत आचार्य चले।
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu was going towards the temple, Paramananda Puri and Brahmananda Bharati were walking ahead of him and Swarupa Damodara and Advaita Acharya were walking beside him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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