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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 204
 
 
श्लोक  2.12.204 
आर दिने जगन्नाथेर ‘नेत्रोत्स व’ नाम ।
महोत्सव हैल भक्तेर प्राण - समान ॥204॥
 
 
अनुवाद
अगले दिन नेत्रोत्सव मनाया गया। यह महान उत्सव भक्तों के जीवन और आत्मा का प्रतीक था।
 
The next day, Netrotsav was celebrated. This festival was like the life of the devotees.
तात्पर्य
भगवान जगन्नाथ के स्नान समारोह के बाद, रथ-यात्रा समारोह से पहले पखवाड़े भर में, भगवान जगन्नाथ के शरीर को धोकर नया रंग-रोगन किया जाता है। इसे अंग-राग के रूप में जाना जाता है। नव-यौवन दिवस की सुबह में भव्य रूप से प्रदर्शन किया जाने वाला नेत्रोत्सव उत्सव, भक्तों के जीवन और आत्मा का निर्माण करता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)