श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 187
 
 
श्लोक  2.12.187 
तबे प्रभु प्रत्येके, सब भक्तेर नाम लला ।
पिठा - पाना देओयाइल प्रसाद करिया ॥187॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने तब जगन्नाथ को अर्पित किए गए भोजन के सभी बचे हुए भाग, जैसे कि केक और मीठे चावल, को लिया और उन्हें अन्य सभी भक्तों को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर वितरित किया।
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu took all the pitha-pana (sweets and kheer) offered to Jagannathji and distributed it among all the other devotees, calling them one by one.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)