श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 177
 
 
श्लोक  2.12.177 
सार्वभौमे प्रभु वसाञाछेन वाम - पाशे ।
दुइ भक्तेर स्नेह देखि’ सार्वभौम हासे ॥177॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने सार्वभौम भट्टाचार्य को अपने बाईं ओर बैठाया और जब सार्वभौम ने स्वरूप दामोदर और जगदानंद का व्यवहार देखा तो वे मुस्कुराये।
 
Mahaprabhu made Sarvabhauma Bhattacharya sit on his left. When Sarvabhauma saw the behavior of Swarupa Damodara and Jagadananda, he began to laugh.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)