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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 167
 
 
श्लोक  2.12.167 
प्रभु कहे, - मोरे देह’ लाफ्रा - व्यञ्जने ।
पिठा - पाना, अमृत - गुटिका देह’ भक्त - गणे ॥167॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "आप मुझे लफड़ा-व्यंजन नामक साधारण सब्जी दे सकते हैं, और आप सभी भक्तों को केक, मीठे चावल और अमृत-गुटिका जैसी बेहतर व्यंजन दे सकते हैं।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “You should serve me simple vegetables called lafra dishes and serve all the devotees delicious dishes like sweets, kheer and amrita gutikas.”
तात्पर्य
लाफ्रा-व्यंजन विभिन्न हरी सब्ज़ियों को एक साथ मिक्स करके बनाया जाता है। इसे अक्सर चावल के साथ मिक्स किया जाता है और गरीब लोगों को दिया जाता है। अमृता-गुटिका गाढ़े पूड़ी को कंडेन्स्ड मिल्क के साथ मिलाकर बनाए गए मिश्रण को कहा जाता है। इसे अमृता-रसावली के नाम से भी जाना जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)