श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 160
 
 
श्लोक  2.12.160 
‘हरिदास’ बलि’ प्रभु डाके घने घन ।
दूरे रहि’ हरिदास करे निवेदन ॥160॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु बार-बार “हरिदास, हरिदास” पुकार रहे थे और उस समय दूर खड़े हरिदास इस प्रकार बोले।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu repeatedly called out, “Haridasa, Haridasa.” He was standing at a distance and spoke from there.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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